देखा है मैंने खोता बचपन.. एक रूपये के सिक्के के लिये पानी मे छलांग लगाता बचपन ढाबे पर जूठन समेटता बचपन.. काँच के गिलास की खनक में खोता बचपन... टायर के पंक्चर जोड़ता बचपन... हाँ देखा है मैंनें खोता बचपन... धान के खेत में उम्मीदें रोंपता बचपन. नशे मे धुत...
by wanderer_wordweaver 7 years ago | via Instagram