पहाड़ों से एक चिट्ठी लिख रही हूँ तुम्हें इस बार पहाड़ों में न सुबह की सिहरन थी और न कँपकपाती रात । अलाव तो तब भी जला हुआ था। उसने जाना कि सिहरन साथ लिख रही कहानी का था और उस कहानी में दो लोगों के अलग हो जाने के...
by wanderer_wordweaver 7 years ago | via Instagram