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पहाड़ों से एक चिट्ठी लिख रही हूँ तुम्हें इस बार पहाड़ों में न सुबह की सिहरन थी और न कँपकपाती रात । अलाव तो तब भी जला हुआ था। उसने जाना कि सिहरन साथ लिख रही कहानी का था और उस कहानी में दो लोगों के अलग हो जाने के...

by wanderer_wordweaver · 8 years ago · via Instagram

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